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शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

दूध, दाग और प्यार...

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जिंदगी के चूल्हे पर

तुम्हारे साथ की तपिश से

प्यार का दूध अभी उफना ही था

कि

तुमने हाथ झटक चूल्हा ही बुझा दिया

और रख दिया तर्क का ढक्कन

कि ...

नहीं तो सारा दूध उफन जाता ;

सच कहना

आखिर किसका तुम्हे डर था ?

मेरे प्यार के उफान का ,

तुम्हारे हाथ के जल जाने का,

दाग लग जाने का.