सारा सुख माई तोरे अचरवा में ;
पूरी दुनीया समाय जाए करेजवा में.
छुट गईल माई तोरे हथवा के साग भात ,
दूध पियें चंदा मामा खायी हम दूध भात,
याद आवे मारल रहली अंगनवा में.............
तीज त्यौहार कौने व्रत नाही छोड़े माई
हमरे ही खातिर ता पीपर भी पूजे माई
बाबा जल पावें सवनवा में....